Saturday, February 13, 2021

 

             *छत्रपति शिवाजी*

Chhatrapati Shivaji Maharaj History in Hindi

  • Chhatrapati Shivaji Maharaj General Knowledge in Hindi: 
छत्रपति शिवाजी महाराज भारतीय इतिहास के महान राजाओं में से एक हैं। इन्होने अपनी बहादुरी से मराठा साम्राज्य का विस्तार किया और कई वर्षों तक मुग़ल साम्राज्य से संघर्ष किया। शिवाजी ने औरंगजेब के भारत पर राज करने के सपने को चकनाचूर कर दिया था। उन्होंने अंग्रेजों को भी अपनी बहादुरी से काफी तंग किया था। आइए वीर छत्रपति शिवाजी महाराज की कहानी और उनसे जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में जानते हैं।

  • Chhatrapati Shivaji Maharaj History in Hindi

छत्रपती शिवाजी महाराज का जन्म 19 फ़रवरी 1630 ई. को शिवनेरी दुर्ग में हुआ था। इस दिन महाराष्ट्र सरकार द्वारा हर वर्ष उनकी जयंती (Chhatrapati Shivaji Maharaj Jayanti) मनाई जाती है।

  • Chhatrapati Shivaji Maharaj Story

शिवाजी के पिता का नाम शाहजी भोंसले और उनकी माता का नाम जीजाबाई था। माता जीजाबाई की देख-रेख में ही शिवाजी का बचपन बीता। इस दौरान उनकी माता ने उन्हें महाभारत, रामायण सहित अन्य शास्त्रों की शिक्षा दी, जिसके बाद वे राम भक्त बन गए थे। वे बचपन से ही काफी बहादुर थे और इसी समय उन्हें ब्राहमण दादाजी कोंडा-देव ने उन्हें राजनीति एवं युद्ध कौशल सिखाए।

वहां के शासकों द्वारा एक वर्ग को बढ़ावा और अन्य वर्गों के लोगों पर किए जा रहे अत्याचार को देखकर शिवाजी बेचैन हो जाते थे। तभी उन्होंने मावलों के साथ मिलकर अपनी सेना बनाना शुरू कर दिया। सबसे पहले शिवाजी ने अपनी सेना के साथ मिलकर बीजापुर के किलों पर कब्ज़ा करने की रणनीति बनाई। बीजापुर पर सुल्तान आदिलशाह शासन करता था, मौका देखकर शिवाजी ने बीजापुर के किलों पर कब्ज़ा करना शुरू कर दिया। उन्होंने सबसे पहले रोहिदेश्वर के किले और फिर तोरणा के किले पर अपना अधिकार जमाया था।

  • Shivaji Maharaj vs Adil Shah

शिवाजी के पिता आदिलशाह के शासन के अंतर्गत प्रमुख पद पर थे, उन्हें पूना की जागीर सौंपी गई थी। जब शिवाजी ने रायगढ़ के किले पर कब्जा कर इसका निर्माण कार्य शुरू किया, तब आदिलशाह ने शिवाजी के पिता से कहा वे अपने बेटे को समझाए, लेकिन पिता के कहने पर भी शिवाजी नहीं रुके। आदिलशाह का गुस्सा बढ़ता गया और उसने शिवाजी के पिता शाहजी राजे को कैदी बना लिया। तब जाकर शिवाजी ने किलों पर कब्ज़ा करना बंद किया। करीब 4 वर्षों तक शिवाजी ने बीजापुर में कोई आक्रमण नहीं किया।

  • Shivaji vs Chandrarao at Jawali

वर्ष 1656 में शिवाजी ने राजा चन्द्रराव मोरे के राज्य जावली पर कब्ज़ा करने का मन बनाया। शिवाजी ने पत्र लिखकर चन्द्रराव मोरे को सन्देश दिया कि वह शांतिपूर्ण ढंग से अपना राज्य उन्हें सौंप दे, पर राजा ने शिवाजी का यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया। जिसके फलस्वरूप शिवाजी ने अपने सैनिकों के साथ जावली पर हमलाकर उसे अपने कब्जे में ले लिया।

  • Shivaji Maharaj vs Afzal Khan

शिवाजी द्वारा दोबारा किलों पर कज्बा करते देख आदिलशाह आगबबूला हो उठा और उसने अपने सबसे क्रूर सेनापति अफजल खां को आदेश दिए की वह शिवाजी को जिंदा या मुर्दा पकड़ कर लाए। भाईचारे का ढोंग रचाकर अफजल खां शिवाजी से मिलने पहुंचा, लेकिन अफजल द्वारा हमला करने से पहले ही शिवाजी ने अपने नाखुनों में फंसे बघनखे से उस पर हमला कर दिया और 10 नवम्बर 1959 को अफजल खां (Afzal Khan Death) की मृत्यु हो गई।

अफजल खां की हत्या करने के बाद शिवाजी तेजी से किलों पर कब्ज़ा जमाते चले गए, उन्होंने पन्हाला, पवनगढ़, वसंतगढ़, राजापुर तथा दावुल पर अपना कब्ज़ा जमाया।

  • Shivaji vs Aurangzeb

उत्तर की बादशाहत हासिल करने के बाद औरंगजेब दक्षिण में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता था। दक्षिण में शिवाजी अपना विस्तार तेजी से कर रहे थे। शिवाजी पर काबू पाने के लिए औरंगजेब ने अपने मामा शाइस्ता खाँ को दक्षिण का सूबेदार बनाया। शाइस्का खाँ ने अपनी फ़ौज के साथ दक्षिण क्षेत्र में 3 वर्षों तक खूब लूटपाट मचाई। इसी बीच मौका देखते ही शिवाजी ने 350 मवलो के साथ शाइस्का खाँ हमला कर दिया। इस दौरान शिवाजी की तलवार से शाइस्ता की चार उंगलिया कट गई, लेकिन वह भागने में कामयाब रहा।

  • Shivaji and Raja Jaysingh (Purandar Ki Sandhi)

शिवाजी ने मुगल शासित क्षेत्रों में लूटपाट करना शुरू किया। सूरत में लूट मचाकर शिवाजी ने काफी धन एकत्रित किया। शिवाजी के बढ़ाते प्रभुत्व को देखकर औरंगजेब ने राजा जयसिंह को हमला करने के आदेश दिए। जब शिवाजी पुरंदर किले (Purandar Fort) में थे तब राजा जयसिंह ने अपनी सेना के साथ उन्हें घेर लिया, जिसके बाद शिवाजी शांति संधि करने के लिए तैयार हुए। जून 1665 में हुई इस सन्धि को पुरंदर की संधि कहा गया।

वर्ष 1666 में शिवाजी पहली बार औरंगजेब के आगरा दरबार में प्रस्तुत हुए, लेकिन यहां उन्हें सम्मान नहीं दिया गया और रोष में आकर वे दरबार से बाहर निकल गए। औरंगजेब ने शिवाजी को नजरबंद कर दिया, अपर वे वहां से निकलने में कामयाब रहे।

जसवंत सिंह के द्वारा वर्ष 1668 में मराठा और मुगलों में दोबारा शांति संधि हुई और औरंगजेब ने शिवाजी को राजा की उपाधि दी।

  • Chhatrapati Shivaji Maharaj Death Reason

वर्ष 1670 में शिवाजी ने दोबारा मुगलों के अधिपत्य सूरत नगर में लूटपाट शुरू की और यहां उनकी सेना ने मुगलों की सेना को हराया। 1674 में ब्राह्मण द्वारा रायगढ़ में भव्य रूप से शिवाजी का राज्याभिषेक किया गया। इसी दौरान उन्हें छत्रपति की उपाधि दी गई। वर्ष 1680 में बीमारी की वजह से उनकी मृत्यु हो गयी थी। उनकी मृत्यु के बाद उनके ज्येष्ठ पुत्र संभाजी को उत्तराधिकार दिया गया।

 

ताजमहल : Taj Mahal History In Hindi

By gkkiduniya1.blogspot.com 13/02/2021

Taj mahal History, Story and Interesting Facts in Hindi: भारत में मुग़ल वंश द्वारा सबसे नायब चीजों में से एक ताज महल है। मुग़ल सम्राट शाहजहां ने अपनी पत्नी मुमताज़ के इंतकाल के बाद उसकी याद में इस नायाब मकबरे को बनवाया था। इस महल को पूरी तरह से संगमरमर से बनाया गया है। करीब 20 सालों से भी ज्यादा समय में इस मकबरे को तैयार किया गया था। ताज महल के अंदर शाहजहां और मुमताज की कब्र है। आइए ताजमहल से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी और इससे जुड़े  रहस्यों के बारे में जानते हैं।

ताजमहल के बारे में जानकारी (About Taj Mahal in Hindi)

उत्तरप्रदेश के नगर आगरा में यमुना नदी के किनारे ताजमहल स्थित है। इसकी ख़ूबसूरती और सबसे अलग आकार की वजह से वर्ष 1983 में इसे वर्ल्ड हेरिटेज साईट (Taj Mahal World Heritage Site) का हिस्सा बनाया गया था। वहीँ वर्ष 2000 में इसे दुनिया के सात अजूबों (Taj Mahal 7 Wonders of the World) में जगह दी गयी थी। इसे इस्लामी कला का रत्न भी घोषित किया गया है। मुग़ल वंश के शासक शारजाह के आदेशानुसार ताजमहल को बनाने का कार्य वर्ष 1632 में शुरू हुआ और 1653 में यह नायाब मकबरा पूरी तरह से बनकर तैयार हो गया, यानी ताजमहल को बनने में 22 वर्षों का समय लगा था। इसका मुख्य गुंबद 60 फीट ऊंचा और 80 फीट चौड़ा है, जिसे बनाने में 15 वर्षों का समय लगा था।

पहले मध्यप्रदेश में बनने वाला था ताजमहल (Mumtaz Mahal Death in Burhanpur Madhya Pradesh)

मुग़ल साम्राज्य के पांचवें सम्राट शाहजहां ने अपनी दूसरी पत्नी मुमताज़ महल अर्जुमंद बानो बेगम की याद में ताजमहल का निर्माण करवाया था। जब मुमताज ने 17 जून 1931 को अपनी 17वीं संतान को जन्म दिया उस समय प्रसाव के दौरान उनका इंतकाल हो गया। उनकी मृत्यु मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले के जैनाबाद में हुई थी। शाहजहाँ मुमताज से बेहद प्यार करते थे और उनकी याद में उन्होंने पहले ताजमहल को बुरहानपुर में बनाने का मन बनाया, लेकिन बाद में उन्होंने इसे आगरा में बनाने का निर्णय लिया।

ताजमहल के अंदर क्या है? (Taj Mahal Inside)

42 एकड़ में फैले इस वर्गाकार महल के मुख्य कक्ष में मुमताज महल एवं शाहजहाँ की नकली कब्रें हैं तथा असली कब्रें निचले तल पर स्थित हैं, इसे मुमताज का मकबरा नाम दिया गया था, क्योंकि मुमताज की अंतिम इच्छा थी कि उनकी कब्र को उनके नाम के मकबरे में दफनाया जाए। इस वजह से शाहजहाँ ने पहले मुमताज की कब्र को बगीचे में दफना कर रखा। जब पूर्णरूप से ताजमहल का काम हो गया तब उनकी कब्र को बगीचे से निकाल कर महल के बीचों बीच दफनाया गया।

ताजमहल किसने तैयार किया? (Who Build Taj Mahal Architecture)

वस्तुकार उस्ताद अहमद लाहौरी (Ustad Ahmad Lahori) की देखरेख में ताजमहल को तैयार किया गया था, उन्हें ख़ास ईरान से बुलवाया गया था। इसके निर्माण कार्य के लिए विदेशों से मजदूरों बुलवाया गया था। 20 हजार मजदूरों की मेहनत से यह बेशकीमती महल तैयार हुआ था और इसका निर्माण कार्य खत्म होने के बाद शाहजहाँ ने सभी मजदूरों के हाथ कटवा दिए थे।

ताजमहल बदलता है अपना रंग? (Does Taj Mahal Change Color)

संगमरमर के पत्थरों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का काम करीब 1000 हाथियों द्वारा किया गया था। इसे बनाने में संगमरमर के अलावा 28 अलग-अलग किस्मों के पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है, जिस वजह से इसका रंग चरों पहर अलग-अलग दिखाई देता है। सुबह के वक़्त इसका रंग गुलाबी, दोपहर में सफ़ेद, शाम के समय भद्दा और पूर्णिमा की रात को सुनहरा नजर आता है। पत्थरों और अन्य रत्नों को अफगानिस्तान, तिब्बत, बगदाद, इजिप्त, रूस, ईरान जैसे देशों से एकत्रित किया गया था। उस समय इस कीमती महल को बनाने में 3 करोड़ 20 लाख रुपए का खर्चा आया था।

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Thursday, February 13, 2020

 * जीनोम परियोजना *                                                                    

  • पूरे मानव अनुवांशिक सामग्री का एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन

      अवलोकन 
  • मानव जीनोम प्रोजेक्ट ( एचजीपी ) एक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक शोध परियोजना थी जिसमें न्यूक्लियोटाइड बेस जोड़े के अनुक्रम को निर्धारित करने के लक्ष्य के साथ मानव डीएनए बना दिया गया था, और मानव जीनोम के सभी जीन को भौतिक और कार्यात्मक दोनों से पहचानने और मैप करने का लक्ष्य था। दृष्टिकोण। यह दुनिया की सबसे बड़ी सहयोगी जैविक परियोजना बनी हुई है। योजना शुरू होने पर 1984 में अमेरिकी सरकार द्वारा विचार उठाए जाने के बाद, परियोजना औपचारिक रूप से 1990 में लॉन्च की गई और इसे 14 अप्रैल, 2003 को पूरा घोषित कर दिया गया। अमेरिकी सरकार से राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान (एनआईएच) के माध्यम से वित्त पोषण दुनिया भर के कई अन्य समूहों के रूप में। सेलेरा निगम, या सेलेरा जीनोमिक्स द्वारा सरकार के बाहर एक समांतर परियोजना आयोजित की गई थी, जिसे औपचारिक रूप से 1998 में लॉन्च किया गया था। अधिकांश सरकारी प्रायोजित अनुक्रम बीस विश्वविद्यालयों और संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, जापान, फ्रांस में शोध केंद्रों में किया गया था। , जर्मनी, स्पेन और चीन।
  • मानव जीनोम परियोजना मूल रूप से मानव हेप्लोइड संदर्भ जीनोम (तीन अरब से अधिक) में निहित न्यूक्लियोटाइड को मैप करने का लक्ष्य रखती है। किसी दिए गए व्यक्ति का "जीनोम" अद्वितीय है; "मानव जीनोम" का मानचित्रण करने से व्यक्तियों की एक छोटी संख्या को अनुक्रमित किया जाता है और फिर प्रत्येक गुणसूत्र के लिए एक पूर्ण अनुक्रम प्राप्त करने के लिए इन्हें एक साथ जोड़ना शामिल होता है। इसलिए, समाप्त मानव जीनोम एक मोज़ेक है, किसी भी व्यक्ति का प्रतिनिधित्व नहीं करता है।

  • एक वैश्विक परियोजना का उद्देश्य सभी मानव जीन का विश्लेषण करना है। एक जीनोम जीन का एक सेट है जो जीवों के अस्तित्व के लिए न्यूनतम आवश्यक है। मनुष्यों में, क्रोमोसोमल डीएनए में लगभग 100,000 जीन वितरित किए जाते हैं जिसमें लगभग 3 अरब बेस जोड़े होते हैं। यह परियोजना लगभग 2005 तक इस पूरे अनुक्रम को समझने और प्रत्येक जीन के कार्य को स्पष्ट करने की कोशिश करनी है। 1 9 88 में, परियोजना को बढ़ावा देने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय संगठन <मानव जीनोम संगठन (एचयूजीओ)> स्थापित किया गया था। प्रत्येक देश की मानव जीनोम विश्लेषण योजना 1990 से शुरू हुई और जापान ने 1 99 1 से गंभीरता से भाग लिया, जिसमें टोक्यो मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट विश्वविद्यालय में <मानव जीनोम विश्लेषण केंद्र> स्थापित करना शामिल था। वर्तमान में गुणसूत्र नक्शे पहले ही पूरा हो चुके हैं, और इस बीमारी के आधार पर आनुवांशिक तकनीकों का उपयोग करके कई बीमारियों से संबंधित जीन खोजे गए हैं। जापान में अनुसंधान संस्थानों ने भी कोलन कैंसर दबाने वाले जीन, तीव्र मायलोोजेनस ल्यूकेमिया जीन इत्यादि को स्पष्ट करने के नतीजे दिए। हालांकि, दूसरी तरफ, जब एक जीन उत्परिवर्तन पाया जाता है, वहां ऐसे कई मामले हैं जहां कोई इलाज नहीं है, और अधिसूचना रोगी एक समस्या है। संयुक्त राज्य अमेरिका में, आनुवांशिक निदान के परिणामस्वरूप जीवन बीमा के अनुबंध को अस्वीकार करने जैसी नई समस्याएं, नौकरी भेदभाव और बर्खास्तगी की ओर अग्रसर हैं। जून 2000 में, जापान, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोप में अंतर्राष्ट्रीय शोध टीम ने पूरे जीनोम के 85% के बराबर डीएनए अनुक्रम का सारांश डेटा <सारांश संस्करण> प्रकाशित किया। शुरुआत में 2005 तक डीकोड करने की योजना बनाई गई थी, अमेरिकी निजी उद्यम भी प्रवेश कर चुके थे और कार्यक्रम शेड्यूल से आगे था, और अप्रैल 2003 में संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, फ्रांस और जर्मनी के छह देशों के प्रतिनिधियों ने समझदारी को पूरा करने की घोषणा की । मानव-मानव जीनोम के बाद की शोध प्रतियोगिता, जैसे कि नई दवा विकास, पहले ही शुरू हो चुका है, और जीन पेटेंट एक बड़ी समस्या बन रहे हैं। जापान में, जून 2000 में, विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद बायोएथिक्स कमेटी ने "मानव जीनोम रिसर्च के बुनियादी सिद्धांत" की स्थापना की, जो शोधकर्ताओं और चिकित्सा पेशेवरों को इस शोध में देखना चाहिए। व्यक्तिगत अनुवांशिक सूचना संरक्षण का सख्ती से पालन, जीन के आधार पर भेदभाव पर प्रतिबंध, पीड़ितों के लिए मुआवजा, आदि शामिल हैं। → जेनेटिक इंजीनियरिंग / जैव प्रौद्योगिकी / जीन थेरेपी
ज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

जीनोम मैपिंग परियोजना

  • जीनोम मैपिंग परियोजना, भारतीय विज्ञान संस्थान, मस्तिष्क अनुसंधान केंद्र, जीनोम अनुक्रमण
  • जीनोम मैपिंग परियोजना का महत्त्व, जीनोम मैपिंग से जुड़े मुद्दे

हाल ही में सरकार ने एक महत्त्वाकांक्षी जीनोम मैपिंग परियोजना (Genome Mapping Project) को मंज़ूरी प्रदान की है।

Important Point :

  • सरकार की महत्त्वाकांक्षी जीनोम मैपिंग परियोजना को भारत की अनुवांशिक विविधता के निर्धारण की दिशा में पहला प्रयास माना जा रहा है।
  • इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 238 करोड़ रुपए है।
  • इस परियोजना में बंगलूरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान (Indian Institute of Science- IISc) एवं कुछ भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (Indian Institute of Technology- IITs) सहित लगभग 20 संस्थान शामिल होंगे।
  • परियोजना से जुड़े भारतीय वैज्ञानिकों के अनुसार, अब तक के आनुवंशिक अध्ययन लगभग 95% सफेद कोकेशियान नमूनों (White Caucasian Samples) पर आधारित थे।

परियोजना से संबंधित मुख्य तथ्य:

  • जनवरी, 2020 के अंत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (Department of Biotechnology-DBT) द्वारा इस परियोजना को मंज़ूरी प्रदान की गई।
  • इस परियोजना के पहले चरण में देश भर से 10,000 लोगों के नमूनों को एकत्रित किया जाएगा।
  • भारत के आनुवंशिक पूल की विविधता का मानचित्रण वैयक्तिकृत चिकित्सा के आधार पर होगा।
  • IISc का मस्तिष्क अनुसंधान केंद्र (Center for Brain Research) जो कि एक स्वायत्त संस्थान है, इस परियोजना के नोडल कार्यालय के रूप में कार्य करेगा तथा इसकी निदेशक प्रो. विजयलक्ष्मी रवींद्रनाथ इस परियोजना की समन्वयक होंगी।
  • इस परियोजना में शामिल संस्थान परियोजना के विभिन्न पहलुओं पर काम करेंगे जिसमें नैदानिक ​​नमूने प्रदान करना और अनुसंधान में सहायता करना, इत्यादि शामिल हैं तथा कुछ IITs द्वारा गणना के नए तरीकों में मदद की जाएगी।
  • इस परियोजना के लिये एक व्यापक डेटाबेस बनाने हेतु दो नई राष्ट्रीय स्तर की विज्ञान योजनाएँ शुरू की जाएंगी।
  • इन्फोसिस के सह-संस्थापक क्रिस गोपालकृष्णन द्वारा उम्र बढ़ने और अल्ज़ाइमर जैसे रोगों के लिये IISc में ब्रेन रिसर्च के लिए मस्तिष्क अनुसंधान केंद्र की स्थापना किये जाने के बाद वर्ष 2017 में इस परियोजना को शुरू करने की दिशा में कदम उठाया गया।

परियोजना का महत्त्व:

  • देश में जनसांख्यिकी विविधता और मधुमेह, मानसिक स्वास्थ्य आदि सहित जटिल विकारों वाले रोगों के बोझ को ध्यान में रखते हुए आनुवंशिक आधार की उपलब्धता से किसी रोग की शुरुआत से पहले ही उसकी रोकथाम की जा सकती है।
  • भारत के आनुवंशिक परिदृश्य का मानचित्रण अगली पीढ़ी के चिकित्सा, कृषि और जैव-विविधता प्रबंधन के लिये महत्त्वपूर्ण है।
  • आधुनिक जीवन-शैली से उत्पन्न बीमारियों जैसे- हृदय संबंधी बीमारियाँ, मधुमेह या अन्य मानसिक स्वास्थ्य मुद्दों के लिये, तकनीकी और कंप्यूटेशनल प्रयासों के साथ अधिक सहयोग किये जाने की आवश्यकता है और जीनोम मैपिंग परियोजना के तहत होने वाली खोजें इस दिशा में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी।
  • यह परियोजना कैंसर से जुड़ी मृत्यु दर को कम करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
  • यह परियोजना दुनिया में अपनी तरह की सबसे महत्त्वपूर्ण परियोजना है और इसके माध्यम से आनुवंशिक अध्ययन के क्षेत्र में क्रांति लाई जा सकती है। साथ ही देश की आनुवंशिक विविधता का निर्धारण भी किया जा सकता है।

संभावित चिंताएँ:

  • पक्षपात: जीनोटाइप (Genotype) पर आधारित पक्षपात, जीनोम अनुक्रमण का एक संभावित परिणाम है। उदाहरण के लिये, नियोक्ता कर्मचारियों को काम पर रखने से पहले उनकी आनुवंशिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। यदि कोई कर्मचारी अवांछनीय तरीके से कार्यबल के प्रति आनुवंशिक रूप से अतिसंवेदनशील पाया जाता है तो नियोक्ता द्वारा उसके जीन प्रारूप/जीनोटाइप (Genotype) के साथ पक्षपात किया जा सकता है।
  • स्वामित्व और नियंत्रण: गोपनीयता और इससे संबंधित मुद्दों के अलावा आनुवंशिक जानकारी के स्वामित्व और नियंत्रण का प्रश्न अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
  • आनुवंशिक डेटा का अनुचित उपयोग: इससे बीमा, रोज़गार, आपराधिक न्याय, शिक्षा, आदि क्षेत्रों में आनुवंशिक डेटा के अनुचित प्रयोग संबंधी चिंताएँ हैं।

आगे की राह:

  • जीनोम मैपिंग परियोजना चिकित्सा, आनुवंशिक विविधता आदि की जानकारी जैसे विभिन्न उद्देश्यों को समाहित किये हुए है, इसलिये इस परियोजना के बेहतर क्रियान्वयन की आवश्यकता है।
  • इस परियोजना में निहित चिंताओं का समाधान किया जाना भी आवश्यक है।
भारतीय अर्थव्यवस्था

प्रत्यक्ष कर विवाद से विश्वास विधेयक, 2020

    • प्रत्यक्ष कर विवाद से विश्वास विधेयक 2020, विवाद से विश्वास योजना, प्रत्यक्ष कर, सबका विश्वास योजना
    • प्रत्यक्ष कर से संबंधित मुद्दे, अप्रत्यक्ष से संबंधित मुद्दे

हाल ही में बजट सत्र के दौरान सरकार ने संसद में प्रत्यक्ष कर विवाद से विश्वास विधेयक, 2020 पेश किया।

Important Point :

  • वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण के दौरान प्रत्यक्ष कर के विवादों के निपटारे हेतु ‘विवाद से विश्वास योजना’ की शुरुआत की है।
  • ध्यातव्य है कि सरकार द्वारा पिछले वर्ष बजट में अप्रत्यक्ष करों से संबंधित विवादों को कम करने के लिये ‘सबका विश्वास योजना’ लाई गई थी और सरकार के अनुसार, इस योजना के परिणामस्वरूप 1,89,000 से अधिक मामलों का निपटारा किया गया है।

प्रत्यक्ष कर विवाद से विश्वास विधेयक, 2020:

  • इस विधेयक का उद्देश्य प्रत्यक्ष कर संबंधी विवादों को तीव्र गति से हल करना है।
  • ध्यातव्य है कि वित्त मंत्री ने बजट में प्रत्यक्ष कर संबंधी विवादों के निपटारे हेतु विवाद से विश्वास योजना का उल्लेख किया है।
  • वर्तमान में विभिन्न अपीलीय मंचों यानी आयुक्त (अपील), आयकर अपीलीय अधिकरण, उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में लगभग 4,83,000 प्रत्यक्ष कर से संबंधित मामले लंबित हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य प्रत्यक्ष कर क्षेत्र में मुकदमेबाज़ी को कम करना है।
  • इस विधेयक में लगभग 9.32 लाख करोड़ रुपए से जुड़े कर विवाद के मामलों के समाधान का प्रावधान है।
  • सरकार को उम्मीद है कि इस योजना से विवादित कर का एक बड़ा हिस्सा तेज़ी से और सरल तरीके से वसूला जा सकेगा।

विवाद से विश्वास योजना:

  • प्रस्तावित विवाद से विश्वास योजना के तहत, एक करदाता को केवल विवादित करों की राशि का भुगतान करना होगा और उसे ब्याज एवं जुर्माने पर पूरी छूट मिलेगी, बशर्ते वह 31 मार्च, 2020 तक भुगतान करे।
  • 31 मार्च, 2020 के बाद इस योजना का लाभ उठाने वालों को कुछ अतिरिक्त राशि का भुगतान करना होगा। हालाँकि यह योजना केवल 30 जून, 2020 तक मान्य रहेगी। यह योजना उन सभी मामलों पर भी लागू होती है जो किसी भी स्तर पर लंबित हैं।

विधेयक से संबंधित विवाद:

  • विपक्ष ने विधेयक के हिंदी नाम के संदर्भ में आलोचना की है और तर्क दिया है कि सरकार विधेयक का नाम हिंदी में रखकर गैर-हिंदी भाषियों पर हिंदी भाषा को आरोपित करना चाहती है।
  • साथ ही विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया है कि यह विधेयक ईमानदार और बेईमान लोगों के साथ समान व्यवहार करता है।

सबका विश्वास योजना

  • यह योजना वित्तीय वर्ष 2019-20 के बजट में अप्रत्यक्ष कर संबंधी विवादों के निपटारे हेतु शुरू की गई थी।
  • सरकार को अंतिम गणना में सबका विकास योजना से 39,500 करोड़ रुपए जुटाने की उम्मीद थी। सबका विश्वास योजना से संबंधित एमनेस्टी विंडो 15 जनवरी, 2020 को बंद हो गई है और तब तक लगभग 90,000 करोड़ रुपए के करों के संबंध में करीब 1.90 लाख करोड़ आवेदन आए हैं।
  • इस योजना की सफलताओं में से एक मोंडेलेज इंडिया फूड्स प्राइवेट लिमिटेड (जिसे पहले कैडबरी इंडिया के नाम से जाना जाता था) ने इस योजना के तहत सरकार के साथ हिमाचल प्रदेश के बद्दी (Baddi) में अपने कथित संयंत्र से संबंधित सबसे विवादास्पद कर विवादों में से एक का निपटारा किया है।
  • ध्यातव्य है कि फर्म पर 580 करोड़ रुपए (कर और जुर्माने को छोड़कर) की कर चोरी का आरोप लगाया गया था। अंततः मोंडेलेज ने इस स्कीम के तहत 20 जनवरी, 2020 को 439 करोड़ रुपए का भुगतान कर विवाद का निपटारा किया।

विवाद से विश्वास योजना के संभावित लाभ:

  • ऐसे समय जब सरकार कर राजस्व में कमी कर रही है, तब इस योजना के माध्यम से विवादित कर की प्राप्ति सरकार के लिये महत्त्वपूर्ण साबित हो सकती है।
  • चूँकि इसके पहले विवाद निपटारे में अत्यधिक समय के नुकसान के साथ दोनों पक्षों को अत्यधिक खर्च उठाना पड़ता था किंतु अब इस योजना के कारण करदाता एवं सरकार दोनों को फायदा होगा।
सामाजिक न्याय 
जेल सुधार

  • सर्वोच्च न्यायालय, जस्टिस अमिताव रॉय समिति
  • जेल सुधार से संबंधित मुद्दे, विचाराधीन कैदी एवं भारतीय न्याय व्यवस्था

हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित समिति ने जेल सुधारों से संबंधित कई महत्त्वपूर्ण सुझाव दिये हैं।

Important Point :

  • सर्वोच्च न्यायालय ने सितंबर 2018 में जस्टिस अमिताव रॉय की अध्यक्षता में दोषियों के जेल से छूटने और पैरोल के मुद्दों पर उनके लिये कानूनी सलाह की उपलब्धता में कमी एवं जेलों की विभिन्न समस्याओं की जाँच करने के लिये एक समिति का गठन किया था।
  • इस समिति में जस्टिस अमिताव रॉय के अतिरिक्त ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट के IG और तिहाड़ जेल के DG शामिल थे।

समिति द्वारा उल्लिखित जेल की समस्याएँ:

  • समिति के अनुसार, अंडर-स्टाफ जेलों में भीड़-भाड़ आम बात है तथा जेल में कैदी और जेल के गार्ड दोनों के मानवाधिकारों का उल्लंघन समान रूप से होता है। अंडरट्रायल कैदी अदालत में बिना सुनवाई के वर्षों तक जेल में बंद रहते हैं। जेलों में विचाराधीन कैदियों का अनुपात दोषियों के अनुपात से अधिक है।
  • जेल विभाग में पिछले कुछ वर्षों से 30% से 40% रिक्तियाँ लगातार बनी हैं।
  • समिति की रिपोर्ट में रसोई में भोजन तैयार करने की प्रक्रिया को अत्यंत प्राचीन बताया गया है। किचन कंजस्टेड और अनहेल्दी (Congested and Unhygienic) हैं तथा यह स्थिति जेलों में वर्षों से बनी हुई है।

समिति द्वारा जेल सुधार के लिये सुझाए गए मुख्य बिंदु:

  • समिति के अनुसार, प्रत्येक नए कैदी को जेल में उसके पहले सप्ताह के दौरान दिन में एक बार अपने परिवार के सदस्यों से फोन पर बात करने की अनुमति दी जानी चाहिये।
  • इसके अतिरिक्त समिति द्वारा सुझाए गए अन्य सुझावों में निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:
    • जेल में खाना पकाने की आधुनिक सुविधाएँ होनी चाहिये।
    • आवश्यक वस्तुओं को खरीदने हेतु कैंटीन की व्यवस्था होनी चाहिये।
    • वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ट्रायल (Trial) की व्यवस्था होनी चाहिये।
  • चूँकि जेलों में विचाराधीन कैदियों का अनुपात दोषियों के अनुपात से अधिक है इसलिये समिति ने इस संदर्भ में सुझाव दिया है कि प्रत्येक 30 कैदियों के लिये कम-से-कम एक वकील होना चाहिये।
  • साथ ही त्वरित मुकदमा (Speedy Trial) जेलों में अप्रत्याशित भीड़ को कम करने का एक महत्त्वपूर्ण उपाय है।
  • जेल विभाग में पिछले कुछ वर्षों से 30% से 40% रिक्तियाँ लगातार बनी हुई हैं इस दिशा में भी आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिये।

Note :

  • न्यायिक व्यवस्था को दुरुस्त करने की आवश्यकता है जिससे कि विचाराधीन कैदियों के मानवाधिकारों की रक्षा की जा सके।
  • चूँकि कैदी मतदान के अधिकार का प्रयोग नहीं कर सकते हैं इसलिये अक्सर वे राजनीतिक दलों के मुद्दों से बाहर रहते हैं, अतः समाज एवं राजनीतिक दलों को विचाराधीन कैदियों की सुरक्षा एवं मानवाधिकारों से संबंधित मुद्दों पर संवेदनशीलता से विचार करना चाहिये।
  • जेल में मिलने वाली सुविधाओं को आधुनिक रूप दिये जाने की आवश्यकता है क्योंकि वर्तमान में उन्हें उपलब्ध सुविधाएँ अत्यंत निम्न स्तर की हैं।
    इसके अतिरिक्त उन्हें आवश्यक कौशल परीक्षण दिया जाना चाहिये ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें, साथ ही उनके लिये आवश्यक शिक्षा की प्राप्ति हेतु विशेष कक्षाएँ भी आयोजित की जा सकती है।
अंतर्राष्ट्रीय संबंध                                                                                   

भारतीय नौसेना की शांतिकालीन रणनीति

  • सागर, मेडागास्कर की अवस्थिति, चक्रवात डायने, ऑपरेशन वनीला
  • हिंद महासागर क्षेत्र में भारतीय नौसेना की शांतिकालीन रणनीति

हाल ही में भारत सरकार ने हिंद महासागर क्षेत्र में स्थित मेडागास्कर (Madagascar) में चक्रवात डायने (Diane) से प्रभावित लोगों को सहायता और राहत उपलब्ध कराने के लिये ऑपरेशन वनीला (Operation Vanilla) के तहत भारतीय नौसेना के पोत आईएनएस ऐरावत (INS Airavat) को भेजा।

मुख्य बिंदु:

  • चक्रवात के कारण आई बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिये मेडागास्कर के राष्ट्रपति एंड्री राजोइलिना (Andry Rajoelina) द्वारा अंतर्राष्ट्रीय मदद की अपील के बाद भारतीय नौसेना द्वारा मेडागास्कर के लोगों को मदद पहुँचाई गई।

शांतिकालीन रणनीति के घटक

(Component Of Peacetime Strategy)

  • हाल के वर्षों में भारत हिंद महासागरीय क्षेत्र में भारतीय नौसेना की शांतिकालीन रणनीति के तहत मानवीय सहायता प्रदाता के रूप में उभरा है।
    • मोज़ांबिक को मदद: मार्च 2019 में जब चक्रवात ईदाई (Idai) ने मोज़ाम्बिक में तबाही मचाई तब भारतीय नौसेना ने मोज़ांबिक की मदद के लिये चार युद्धपोतों को तैनात किया था।
    • इंडोनेशिया को मदद: वर्ष 2019 में जब इंडोनेशिया के सुलावेसी द्वीप पर उच्च तीव्रता के भूकंप आया तब भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन समुद्र मैत्री (Operation Samudra Maitri) के तहत इंडोनेशिया को तत्काल चिकित्सा सहायता पहुँचाई थी।
  • वर्ष 2019 में भारतीय नौसेना ने टाइफून हागिबिस (Hagibis) से प्रभावित जापान को मदद पहुँचाने के लिये दो युद्धपोत भेजे थे।
भारतीय नौसेना का यह नया मानवीय दृष्टिकोण हिंद महासागरीय क्षेत्र में भारतीय प्रधानमंत्री के विज़न 'सागर’ (क्षेत्र में सभी के लिये सुरक्षा और विकास- Security and Growth for all in the Region) की एक अभिव्यक्ति है।

सागर- क्षेत्र में सभी के लिये सुरक्षा एवं संवृद्धि

(SAGAR- Security And Growth for All in the Region):

  • सागर (SAGAR) कार्यक्रम को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मॉरीशस यात्रा के दौरान वर्ष 2015 में नीली अर्थव्यवस्था पर ध्यान केंद्रित करने हेतु शुरू किया गया था।
  • इस कार्यक्रम के माध्यम से भारत हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि भी सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है।
  • इस कार्यक्रम का मुख्य सिद्धांत; सभी देशों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय समुद्री नियमों और मानदंडों का सम्मान, एक-दूसरे के हितों के प्रति संवेदनशीलता, समुद्री मुद्दों का शांतिपूर्ण समाधान तथा समुद्री सहयोग में वृद्धि इत्यादि है।
हिंद महासागरीय क्षेत्र में भारत क्षेत्रीय सुरक्षा प्रदाता के रुप में-
  • पिछले कुछ वर्षों में भारत ने हिंद महासागरीय क्षेत्र में बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव मिशन को अंजाम देकर स्वयं को ‘क्षेत्रीय सुरक्षा प्रदाता’ (Regional Security Provider) के रूप में स्थापित किया है।
    • गौरतलब है कि वर्ष 2004 में भारत में आई सुनामी के बाद भारतीय नौसेना की मानव केंद्रित समुद्री सुरक्षा रणनीति पर अधिक ज़ोर दिया गया इसके तहत पहली बार भारतीय नौसेना के कमांडरों ने हिंद महासागरीय क्षेत्र में बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव मिशन के महत्त्व को पहचाना।
  • भारतीय नौसेना ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र के देशों की मदद के लिये अपनी वित्तीय स्थिति को मज़बूत किया है तथा विशेष उपकरणों की अधिक-से-अधिक तैनाती के साथ जटिल मिशनों को पूरा करने की क्षमता हासिल कर ली है।
    • जटिल मिशनों के अंतर्गत भारतीय नौसेना ने वर्ष 2015 में अदन की खाड़ी पर नियंत्रण को लेकर यमन में हुए संघर्ष के दौरान वहाँ फंसे 1500 भारतीयों और 1300 विदेशी नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकला था।
    • यमन संकट के तीन वर्ष बाद भारतीय नौसेना ने यमन के पास चक्रवात से प्रभावित सोकोत्रा ​​(Socotra) द्वीप पर फंसे 38 भारतीयों को सुरक्षित बाहर निकालने में मदद की थी।
  • विश्लेषक मानते हैं कि इस तरह के मिशनों से भारत की सॉफ्ट पावर की छवि को मज़बूती मिलती है और इससे हिंद महासागरीय क्षेत्र में भारत को अपने प्रभाव क्षेत्र का विस्तार करने में मदद मिलेगी।

चुनौतियाँ:

  • यद्यपि मानव केंद्रित सुरक्षा रणनीति के तहत हिंद महासागरीय देशों में सीमित नौसैनिकों की उपस्थिति भारत के लिये रणनीतिक क्षमता का निर्माण करती है किंतु विदेशी जलक्षेत्र में लंबे समय तक युद्धपोतों की उपस्थिति भागीदार देशों को चिंतित कर सकती है।
  • विशेषज्ञों द्वारा भारतीय नौसेना की शक्ति को सूक्ष्म तरीके से रेखांकित करना चाहिये न कि किसी धारणा के आधार पर अर्थात् किसी मिशन के अंतर्निहित इरादे को भू-राजनीतिक लाभ लेने के तौर पर प्रदर्शित न होने दें।

क्षमता निर्माण और सहयोग की आवश्यकता:

  • गौरतलब है कि इन मिशनों के दौरान प्रदान की गई सहायता कुशल और लागत प्रभावी है इसके लिये समर्पित आपदा-राहत प्लेटफार्मों का उपयोग किया गया है।
    • किंतु अमेरिका और चीन के विपरीत भारत नियमित युद्धपोतों एवं सर्वेक्षण जहाज़ों को चिकित्सा सहायता के किये उपयोग करता है। जबकि अमेरिका और चीन के इन्वेंट्री अस्पताल जहाज़ पूरी तरह से चिकित्सा सहायता के लिये सुसज्जित हैं।
  • भारत के कामचलाऊ आपदा-राहत जहाज़ अमेरिकी नौसेना के चिकित्सा जहाज़ यूएसएनएस मर्सी (USNS Mercy) या पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी के पीस आर्क (Peace Ark) से मेल नहीं खाते हैं जो विशेष चिकित्सा सेवाओं देने में सक्षम हैं।
    • अतः भारतीय नौसेना को हिंद-प्रशांत नौ सेनाओं विशेष रूप से अमेरिकी नौसेना, रॉयल ऑस्ट्रेलियाई नौसेना और जापानी सेल्फ-डिफेंस फोर्सेज के साथ अधिक समन्वय की आवश्यकता है। इन देशों की नौ सेनाओं के पास मानवीय खतरों को कम करने के लिये अधिक अनुभव है और इनकी वित्तीय स्थिति भी अधिक मज़बूत है।

Note :

  • चूंकि हिंद महासागरीय क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाएँ लगातार और तीव्र होती जा रही हैं इसलिये भारत की क्षेत्रीय सुरक्षा प्रदाता की भूमिका बढ़ने की संभावना है। इसके लिये भारतीय नौसेना के मानवीय सहायता मिशन एक बड़े सहकारी प्रयास के अंतर्गत समुद्री साझा क्षेत्र में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
भारतीय राजनीति

धन्यवाद प्रस्ताव

  • धन्यवाद प्रस्ताव
  • धन्यवाद प्रस्ताव से संबंधित मुद्दे

हाल ही में लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के संदर्भ में बहस हुई।

धन्यवाद प्रस्ताव क्या होता है?

  • प्रत्येक आम चुनाव के पहले सत्र एवं वित्तीय वर्ष के पहले सत्र में राष्ट्रपति सदन को संबोधित करता है।
  • अपने संबोधन में राष्ट्रपति पूर्ववर्ती वर्ष और आने वाले वर्ष में सरकार की नीतियों एवं योजनाओं का खाका खींचता है।
  • राष्ट्रपति के इस संबोधन को ‘ब्रिटेन के राजा का भाषण’ से लिया गया है, दोनों सदनों में इस पर चर्चा होती है इसे ही ‘धन्यवाद प्रस्ताव’ कहा जाता है।
  • बहस के बाद प्रस्ताव को मत विभाजन के लिये रखा जाता है।
  • इस प्रस्ताव का सदन में पारित होना आवश्यक है, नहीं तो इसको सरकार की पराजय माना जाता है।
  • राष्ट्रपति का यह प्रारंभिक भाषण सदस्यों को चर्चा तथा वाद- विवाद के मुद्दे उठाने और कमियों हेतु सरकार तथा प्रशासन की आलोचना करने का अवसर प्रदान करता है।
संसद में सदस्यों द्वारा चर्चा के लिये लाए जाने वाले प्रमुख प्रस्ताव इस प्रकार हैं:
  • महत्त्वपूर्ण प्रस्ताव
  • स्थानापन्न प्रस्ताव
  • पूरक प्रस्ताव- इसकी तीन श्रेणियाँ हैं:
    • सहायक प्रस्ताव
    • स्थान लेने वाला प्रस्ताव
    • संशोधन
  • कटौती प्रस्ताव- सामान्यतः 4 प्रकार के कटौती प्रस्ताव होते हैं:
    • साधारण कटौती
    • घटकों में कटौती
    • कंगारू कटौती
    • गिलोटिन प्रस्ताव
  • विशेषाधिकार प्रस्ताव
  • ध्यानाकर्षण प्रस्ताव
  • स्थगन प्रस्ताव
  • अविश्वास प्रस्ताव
  • विश्वास प्रस्ताव
  • निंदा प्रस्ताव
  • अनियत दिवस
  • विलंबकारी प्रस्ताव