Hello दोस्तों मैं अनुज कुमार आज मै आपके लिए लेकर आया हूँ बहुत interesting टॉपिक भूगोल
पृथ्वी के प्रारंभिक वातावरण में कार्बनडाइऑक्साइड
हाल ही में साइंस एडवांसेज़ (Science Advances) नामक पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन से पता चला है कि पृथ्वी का प्रारंभिक वातावरण ऑक्सीजन से नहीं बल्कि कार्बन डाइऑक्साइड से समृद्ध था।
मुख्य बिंदु:
- यह अध्ययन लगभग 2.7 बिलियन वर्ष पहले पृथ्वी से टकराने वाले सूक्ष्म उल्का पिंडों के नमूनों के आधार पर किया गया है।
- प्राचीन सूक्ष्म उल्का पिंडों में ऑक्सीकरण (Oxidation) की मात्रा बताती है कि हमारे ग्रह के शुरुआती वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा काफी ज़्यादा थी।
- वर्तमान में पृथ्वी के वातावरण में नाइट्रोजन गैस की मात्रा सबसे ज़्यादा पाई जाती है।
- शोधकर्त्ताओं ने बताया है कि ये सूक्ष्म उल्कापिंड वातावरण में सघन कार्बन डाइऑक्साइड वाले क्षेत्र से होकर गुज़रे थे। इसका मतलब है कि पृथ्वी पर शुरूआती समय में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा अधिक थी।
- ये सूक्ष्म उल्कापिंड पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के पिलबारा के चूना-पत्थर क्षेत्र में आर्कियन ईओन (Archean Eon) युग में गिरे थे जब सूर्य का गुरुत्वाकर्षण बल आज की अपेक्षा कमज़ोर था।
आर्कियन ईऑन (Archean Eon):
- आर्कियन ईऑन, पृथ्वी के इतिहास के चार भूगर्भीय कालों में से एक है जो 4 से 2.5 बिलियन वर्ष पहले था।
- आर्कियन ईऑन के दौरान पृथ्वी की ऊपरी परत काफी ठंडी हो गई थी जिससे महाद्वीपों के गठन की शुरुआत हुई और जीवन पनपने लगा था।
पूर्व में किये गए अध्ययन से संबंधित जानकारी:
- पहले किये गए अध्ययन में बताया गया था कि उल्कापिंड यहाँ ऑक्सीजन से टकराए थे, लेकिन यह बात उन सिद्धांतों और सबूतों का खंडन करती है जो बताता है कि पृथ्वी का प्रारंभिक वातावरण वस्तुतः ऑक्सीजन से रहित था।
- शोधकर्त्ताओं द्वारा वर्ष 2016 का एक शोधपत्र जो सूक्ष्म उल्का पिंडों की खोज के बारे में था, प्रकाशित किया गया था जिसमें बताया गया कि आर्कियन ईऑन के समय गिरे सूक्ष्म उल्का पिंडों में वायुमंडलीय ऑक्सीजन के सबूत मिले हैं।
- नई व्याख्या हमारे ग्रह के शुरुआती दिनों की वर्तमान समझ को लेकर विरोधाभास उत्पन्न करती है जो ‘ग्रेट ऑक्सीकरण घटना’ (Great Oxidation Event) को भी गलत साबित कर सकती है।
ग्रेट ऑक्सीकरण घटना (Great Oxidation Event):
- माना जाता है कि पृथ्वी के वायुमंडल में मुक्त ऑक्सीजन की उपस्थिति के कारण ‘ग्रेट ऑक्सीकरण घटना’ हुई।
- यह घटना ऑक्सीजन उत्पन्न करने वाले साइनोबैक्टीरिया के कारण संभव हो सकी जो 2.3 अरब वर्ष पहले बहुकोशिकीय रूपों में थे।
- साइनोबैक्टीरिया पृथ्वी पर सबसे पुराने जीवों से संबंधित है। ये जीव आज भी महासागरों और गर्म क्षेत्रों में मौजूद हैं। इन जीवों ने ऑक्सीजन का उत्पादन करके और बहुकोशिकीय रूपों में विकसित होकर साँस लेने वाले जीवों के उद्भव में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- वैज्ञानिकों के अनुसार, समुद्रों और वायुमंडल में मुक्त ऑक्सीजन के स्तर में वृद्धि से कुछ ही समय पहले बहुकोशिकीयता (Multicellularity) विकसित हुई।
- जीव विज्ञानी मानते हैं कि इस बहुकोशिकीयता (Multicellularity) का संबंध ऑक्सीजन की वृद्धि से था और इस प्रकार इनकी (साइनोबैक्टीरिया) वजह से पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत हुई।
पृथ्वी के वातावरण की उत्पत्ति को लेकर मतभेद:
- माना जाता है कि पृथ्वी पर जीवन 3.8 अरब वर्ष से भी अधिक पहले शुरू हुआ था किंतु पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत को लेकर शोधकर्त्ताओं में मतभेद है।
- शोधकर्त्ता मानते हैं कि पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत कब हुई, यह एक महत्त्वपूर्ण प्रश्न है किंतु सबसे महत्त्वपूर्ण पहलू यह है कि वायुमंडल किससे बना था, क्या यह पहले से ही उपलब्ध था और यहाँ की जलवायु कैसी थी
- वर्ष 2018 में हेलीयोन नामक जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में यह बात भी सामने आई थी कि आज से तकरीबन 3.6 अरब वर्ष पहले पृथ्वी पर ऑक्सीजन का निर्माण होना शुरू हुआ था। जबकि अभी तक वैज्ञानिक यह मान रहे थे कि ऑक्सीजन का निर्माण करने वाले पहले सूक्ष्म जीव ‘साइनोबैक्टीरिया’ थे।
- इस अध्ययन में बताया गया था कि इन सूक्ष्म जीवों से करीब एक अरब वर्ष पहले ही पृथ्वी पर ऑक्सीजन का निर्माण शुरू हो गया था।
Note :
इस शोध के बाद पृथ्वी की प्रारंभिक स्थिति का पता लगाने से न केवल पृथ्वी के इतिहास को समझने में आसानी होगी बल्कि अन्य ग्रहों पर जीवन की संभावनाओं की खोज में भी मदद मिल सकती है।